Best Discount For You

BIG BREAKING NEWS INDIAN GLOBAL : NEW NATIONAL EDUCATION POLICY 2020, 30 YEARS AFTER NEW NATIONAL EDUCATION POLICY , THE NEW EDUCATION POLICY FOCUSES ON LEARNING RATHER THEN READING,

राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर राज्यपालों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित किया : 


राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर राज्यपालों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित कर रहे हैं। सरकार की ओर से 29 जुलाई को नई शिक्षा नीति का एलान किया गया। इस नीति पर अभी भी मंथन जारी है। पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा नीति में सरकार का प्रभाव कम होना चाहिए। वहीं, राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति इक्कीसवीं सदी की आवश्यकताओं व आकांक्षाओं के अनुरूप देशवासियों को, विशेषकर युवाओं को आगे ले जाने में सक्षम होगी।


पढ़ें पीएम मोदी ने संबोधन में क्या कहा

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, देश की आकांक्षाओं को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था होती है। शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी से केंद्र , राज्य सरकार, स्थानीय निकाय, सभी जुड़े होते हैं। लेकिन ये भी सही है कि शिक्षा नीति में सरकार, उसका दखल, उसका प्रभाव, कम से कम होना चाहिए। 

उन्होंने कहा, शिक्षा नीति से जितना शिक्षक, अभिभावक और छात्र जुड़े होंगे, उतना ही उसकी प्रासंगिकता और व्यापकता, दोनों ही बढ़ती है। देश के लाखों लोगों ने, शहर में रहने वाले, गांव में रहने वाले, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने, इसके लिए अपना फीडबैक दिया था। 


पीएम ने कहा, गांव में कोई शिक्षक हो या फिर बड़े-बड़े शिक्षाविद, सबको राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अपनी शिक्षा नीति लग रही है। सभी के मन में एक भावना है कि पहले की शिक्षा नीति में यही सुधार तो मैं होते हुए देखना चाहता था। ये एक बहुत बड़ी वजह है।


प्रधानमंत्री ने कहा, आज दुनिया भविष्य में तेजी से बदलती नौकरियों, काम के तरीकों को लेकर चर्चा कर रही है। ये पॉलिसी देश के युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के मुताबिक ज्ञान और कौशल, दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी। 


उन्होंने कहा, नई शिक्षा नीति, पढ़ने के बजाय सीखने पर फोकस करती है और पाठ्यक्रम से और आगे बढ़कर गहन सोच पर जोर देती है। इस पॉलिसी में प्रक्रिया से ज्यादा जुनून, व्यावहारिकता और प्रदर्शन पर बल दिया गया है। 


पीएम मोदी ने कहा, इसमें मूलभूत शिक्षा और भाषा पर भी फोकस है। इसमें सिखने का परिणाम और शिक्षक प्रशिक्षण पर भी फोकस है। इसमें पहुंच और मूल्यांकन को लेकर भी व्यापक रिफॉर्म्स किए गए हैं। इसमें हर छात्र को सशक्तिकरण करने का रास्ता दिखाया गया है।


उन्होंने कहा, लंबे समय से ये बातें उठती रही हैं कि हमारे बच्चे बैग और बोर्ड एग्जाम के बोझ तले, परिवार और समाज के दबाव तले दबे जा रहे हैं। इस पॉलिसी में इस समस्या का प्रभावी तरीके से समाधान किया गया है।


प्रधानमंत्री ने कहा, नई शिक्षा नीति में हमारे सही मायने में बिना दबाव के, बिना अभाव और बिना प्रभाव के सीखने के लोकतांत्रिक मूल्यों को हमारी शिक्षा व्वयस्था का हिस्सा बनाया गया है। 21वीं सदी में भी भारत को हम एक ज्ञान अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रयासरत हैं। 



उन्होंने कहा, नई शिक्षा नीति ने प्रतिभा पलायन से निपटने के लिए और सामान्य से सामान्य परिवारों के युवाओं के लिए भी सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कैम्पस को भारत में स्थापित करने का रास्ता खोला है। 


पीएम मोदी ने कहा, ये शिक्षा नीति, सरकार की शिक्षा नीति नहीं है। ये देश की शिक्षा नीति है। जैसे विदेश नीति देश की नीति होती है, रक्षा नीति देश की नीति होती है, वैसे ही शिक्षा नीति भी देश की ही नीति है। 


उन्होंने कहा, कोई भी सिस्टम, उतना ही प्रभावी और सम्मिलित हो सकती है, जितना बेहतर उसका गवर्नेंस मॉडल होता है। यही सोच शिक्षा से जुड़ी गवर्नेंस को लेकर भी ये पॉलिसी रिफ्लेक्ट करती है। 


प्रधानमंत्री ने कहा, कोशिश ये की जा रही है कि उच्च शिक्षा के हर पहलू, चाहे वो अकादमिक हो, टेक्निकल हो, वोकेशनल हो, हर प्रकार की शिक्षा को भूमिगत कक्ष से बाहर निकाला जाए।प्रशासनिक परतों को कम से कम रखा जाए, उनमें अधिक समन्वय हो, ये प्रयास भी इस पॉलिसी के माध्यम से किया गया है। 


पढ़ें राष्ट्रपति कोविंद ने संबोधन में क्या कहा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, परामर्शों की अभूतपूर्व और लंबी प्रक्रिया के बाद तैयार की गई है। मुझे बताया गया है कि इस नीति के निर्माण में, ढाई लाख ग्राम पंचायतों, साढ़े बारह हजार से अधिक स्थानीय निकायों तथा लगभग 675 जिलों से प्राप्त दो लाख से अधिक सुझावों को ध्यान में रखा गया है।


उन्होंने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति इक्कीसवीं सदी की आवश्यकताओं व आकांक्षाओं के अनुरूप देशवासियों को, विशेषकर युवाओं को आगे ले जाने में सक्षम होगी। यह केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत के शिक्षार्थियों एवं नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।


कोविंद ने कहा, 1968 की शिक्षा नीति से लेकर इस शिक्षा नीति तक, एक स्वर से निरंतर यह स्पष्ट किया गया है कि केंद्र व राज्य सरकारों को मिलकर सार्वजनिक शिक्षा के क्षेत्र में जीडीपी के 6 प्रतिशत निवेश का लक्ष्य रखना चाहिए। 2020 की इस शिक्षा नीति में इस लक्ष्य तक शीघ्रता से पहुंचने की अनुशंसा की गई है। 


उन्होंने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली ही जीवंत लोकतान्त्रिक समाज का आधार होती है। अतः सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है।


राष्ट्रपति ने कहा, नई शिक्षा नीति में इस बात पर बल दिया गया है कि हम सबको भारतीय जीवन-मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा प्रणाली विकसित करनी है। साथ ही यह भी प्रयास करना है कि सभी को उच्च गुणवत्ता से युक्त शिक्षा प्राप्त हो तथा एक जीवंत व समता-मूलक नॉलेज सोसाइटी का निर्माण हो। उन्होंने कहा, शिक्षा के माध्यम से हमें ऐसे विद्यार्थियों को गढ़ना है जो राष्ट्र-गौरव के साथ-साथ विश्व-कल्याण की भावना से ओत-प्रोत हों और सही अर्थों में ग्लोबल सिटिजन बन सकें।


राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, वर्ष 2025 तक प्राथमिक विद्यालय स्तर पर सभी बच्चों को मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान प्राप्त कराना इस शिक्षा प्रणाली की सर्वोच्च प्राथमिकता तय की गई है। इसके आधार पर ही आगे की शिक्षा का ढांचा खड़ा हो सकेगा।


उन्होंने कहा, शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बुनियादी बदलावों में शिक्षकों की केंद्रीय भूमिका रहेगी। इस शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षण के पेशे में सबसे होनहार लोगों का चयन होना चाहिए तथा उनकी आजीविका, मान-मर्यादा और स्वायत्तता को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।


राष्ट्रपति ने कहा, स्कूली शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए 2021 तक, इस शिक्षा नीति पर आधारित, टीचर्स एजुकेशन का एक नवीन और व्यापक पाठ्यक्रम तैयार करने का लक्ष्य है। टीचर्स एजुकेशन, उच्च शिक्षा का अंग है। अतः राज्य स्तर पर आप सबको टीचर्स एजुकेशन से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करना है। 


उन्होंने कहा, 12वीं पंचवर्षीय योजना के आकलन के अनुसार, भारत में वर्कफोर्स के 5 परसेंट से भी कम लोगों ने औपचारिक व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त की थी। यह संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका में 52 परसेंट, जर्मनी में 75 परसेंट और दक्षिण कोरिया में 96 परसेंट थी।


कोविंद ने कहा, भारत में व्यावसायिक शिक्षा के प्रसार में तेजी लाने की आवश्यकता को देखते हुए यह तय किया गया है कि स्कूल तथा हायर एजुकेशन सिस्टम में वर्ष 2025 तक कम से कम 50 परसेंट विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जाएगी।


उन्होंने कहा, यह देखा गया है कि रिसर्च और इनोवेशन में निवेश का स्तर अमेरिका में जीडीपी का 2.8 फीसदी, दक्षिण कोरिया में 4.2 फीसदी और इस्राइल में 4.3 फीसदी है जबकि भारत में यह केवल 0.7 फीसदी है।


राष्ट्रपति ने कहा, सभी क्षेत्रों में गुणवत्ता युक्त शैक्षिक अनुसंधान को प्रेरित करने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी। शोध की संस्कृति को मजबूत बनाने के लिए सभी विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय अनुसंधान फ़ाउंडेशन के साथ मिल कर काम करना होगा।


उन्होंने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सफलता केंद्र तथा राज्य दोनों के प्रभावी योगदान पर निर्भर करेगी। भारतीय संविधान के अंतर्गत शिक्षा कनकरेंट लिस्ट का विषय है। अतः इसमें केंद्र और राज्यों द्वारा संयुक्त और समन्वयपूर्ण कार्रवाई की आवश्यकता है।


राष्ट्रपति ने कहा, मैं चाहूंगा कि सभी राज्यपाल अपने राज्यों में नई शिक्षा नीति को कार्यरूप देने के लिए थीम आधारित वर्चुअल सम्मेलन करें। शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श के उपरान्त आप अपने सुझाव केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेज सकते हैं ताकि उनका देशव्यापी उपयोग किया जा सके।

राष्ट्रपति कोविंद और पीएम मोदी का संबोधन

for more News log in https://worldbharthnews.blogspot.com/



Post a Comment

0 Comments