नेपाल में सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) का संकट 10 दिन टल गया है। पार्टी के ज्यादातर नेता प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। बुधवार को हुई मीटिंग में ओली से कहा गया कि वे विरोधी नेताओं की मांगों पर 10 दिन के तय वक्त में जवाब दें। ओली इस मीटिंग में शामिल होना ही नहीं चाहते थे। लेकिन, सीनियर लीडर पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड के दबाव के आगे वे मजबूर हो गए।
इस बीच, नेपाल के कुछ नेताओं ने एनसीपी की मीटिंग के पहले ओली के चीन की राजदूत होउ यांकी से दो घंटे की मुलाकात पर सवाल उठाए। नेपाली कांग्रेस के एक नेता ने कहा- यह बात समझ से परे है कि जब भी ओली पर संकट आता है तो वे चीनी दूतावास की तरफ क्यों देखते हैं।
अब भारी दबाव में हैं ओली
बुधवार को ओली के तमाम विरोधी नेता पीएम के ऑफिशियल रेसिडेंस बालूवाटर पहुंचे। इस मीटिंग में कुल 9 नेता शामिल हुए। इनमें से 6 ओली के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि तीन उनके पक्ष में हैं। बंद कमरे में हुई मीटिंग के बाद पार्टी प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने कहा- तमाम बातों पर गंभीरता से विचार किया गया है। कुछ चीजें सामने आई हैं और इन पर बातचीत की जरूरत है। अगली मीटिंग 28 नवंबर को होगी। हम उम्मीद करते हैं कि कोई ऐसा हल जरूर निकल आएगा जो सबको मंजूर होगा। इससे ज्यादा अभी कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा।
विरोधियों की मांग
दहल की अगुआई वाले विरोधी खेमे ने ओली को 19 पेज का प्रस्ताव सौंपा है। इसमें सरकार के कामकाज और पार्टी विरोधी नीतियों पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि प्रस्ताव में सीधे तौर पर ओली को इस्तीफे के लिए कोई समय सीमा दी गई है या नहीं। पार्टी के सीनियर लीडर माधव कुमार नेपाल ने कहा- हमने पीएम से साफ कह दिया है कि वे 10 दिन में तमाम बातों पर विचार करें और हमें बताएं कि वे क्या करना चाहते हैं। हमारे पास तमाम विकल्प खुले हैं।
आगे क्या होगा?
ये 10 दिन बाद ही तय होगा कि ओली पीएम बने रहते हैं या इस्तीफा देते हैं। वे पार्टी अध्यक्ष भी हैं। उन्हें कोई एक पद निश्चित तौर पर छोड़ना होगा। माना जा रहा है कि अगर ओली ने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया तो कुछ दिनों बाद ही सही उन्हें पीएम की कुर्सी भी छोड़नी होगी क्योंकि वे पार्टी पर पकड़ पहले ही खो चुके हैं। विरोधी नेता भी यही चाहते हैं कि ओली पहले पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ें।
चीन कनेक्शन
नेपाली कांग्रेस के एक नेता ने हिमालयीन टाइम्स से कहा- नेपाल की राजनीति में चीन की दखल मंजूर नहीं किया जा सकता। हम अपनी घरेलू राजनीति में विदेशी दखल स्वीकार क्यों कर रहे हैं। चार महीने में दूसरी बार ओली सरकार पर संकट आया है और हर बार की तरह चीनी दूतावास एक्टिव हो गया। आखिर ओली को देश को यह बताना चाहिए कि चीनी राजदूत से उनकी क्या बातचीत हुई।
बुधवार को हुई मीटिंग के ठीक एक दिन पहले ओली ने चीन की राजदूत होउ याकी से अपने रेसिडेंस पर 2 घंटे मीटिंग की थी। माना जा रहा है कि जुलाई की तरह इस बार भी चीनी राजदूत ओली सरकार और विरोधियों में समझौता कराना चाहती हैं। ओली का अब तक रुख चीन समर्थित रहा है।
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