कोराना संक्रमण फैलने के बाद से ही अमेरिका के स्टूडेंट म्यूजिक ग्रुप्स पर इसका बेहद नकारात्मक असर पड़ा। स्कूलों में म्यूजिक सीख रहे बच्चों की क्लास बंद हो गई। छात्रों को प्रैक्टिस के लिए घर पर महंग-महंगे वाद्य यंत्र नहीं मिल पाए। जिन विश्वविद्यालयों में म्यूजिक की पढ़ाई चली भी वहां इसे ऑनलाइन सिखाया गया जिसका कोई खास फायदा नहीं मिल पाया।
लेकिन अब छात्रों और विभिन्न स्टूडेंट बैंड्स ने दोबारा प्रैक्टिस शुरू कर दी है। यहां पर विभिन्न तरह के रिसर्च के बाद कई हल निकाले गए हैं। जैसे- यहां ट्रम्पट, वुड्विंड जैसे मुंह से बजाने वाले वाद्य यंत्रों के बाहरी हिस्से को नायलॉन के कपड़े से ढंककर बजाया जा रहा है।
इन्हें कचरा रखने वाली पतली प्लास्टिक से भी ढंका जा रहा है। यही नहीं इन्हें बजाने वाले भी चुंबक लगे विशेष मास्क पहन रहे हैं, जिसमें आगे की तरफ चीरा है और वो यंत्र हटाते ही स्वयं बंद हो जाता है। ये समूह जब प्रैक्टिस करते हैं तो 6 फीट के ‘हूला हूप्स’ में बैठकर करते हैं, जिन्हें पानी के पाइप से बनाया गया है।
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